मध्‍य प्रदेश की चिंता शुद्ध हवा नहीं तो कैसे बचेगा जीवन, इसल


भोपाल। शुद्ध हवा नहीं तो जीवन भी सुरक्षित नहीं, इसलिए हवा के लिए वनों का होना जरूरी है, ये जितने सघन होंगे, हवा उतनी ही शुद्ध होगी और जीवन उतना ही स्‍वस्‍थ। मध्‍य प्रदेश को अभी हाल ही में पुन: टाइगर और तेंदुआ स्‍टेट घोषित किया गया था लेकिन अब वह इसके साथ अपने सघन वनों के लिए भी खासी उपलब्‍धी हासिल करने वाला प्रदेश बन गया है।  प्रदेश में वन्य जीवों की बढ़ती संख्या के साथ ही अति सघन वन क्षेत्र में भी बढ़ोतरी हो गई है। जिसका ताजा प्रभाव यह है कि बढ़ते वन क्षेत्र जीव-जंतुओं के लिये अनुकूल परिस्थिति निर्मित कर रहा हैं। राज्‍य में विंध्य क्षेत्र में हरियाली का दायरा तेजी के साथ बढ़ा है। यहां पर वन भूमि के साथ ही राजस्व भूमि में भी बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए, जिसका असर यह हुआ कि पहले की तुलना में कई गुना अधिक हरियाली हो गई है। पन्ना जिले में करीब 75 फीसदी से अधिक फारेस्ट कवर बढ़ा है। इसके अलावा राज्‍य में रीवा, सतना, सीधी, शहडोल और अनूपपुर में सघन वन क्षेत्र का दायरा बढ़ा है। 

वन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अति सघन वन क्षेत्र में 2 लाख 43 हजार 700 हेक्टेयर की वृद्धि हो हुई है। यह वृद्धि यहां इसलिए संभव हुई है क्‍योंकि राज्‍य में संयुक्त वन प्रबंधन की विचारधारा को अपनाया गया है। संयुक्त वन प्रबंधन में 10 हजार 141 ग्राम वन समिति, 4419 वन सुरक्षा समिति और 1044 ईको विकास समिति गठित की गई हैं। वन समितियों की कुल संख्या 15 हजार 604 है। इनके माध्यम से 79 हजार 705 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्रों का प्रबंधन किया जा रहा है। वन समितियों में 33 प्रतिशत महिलाओं की सदस्यता आरक्षण के साथ ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद में से एक महिला की नियुक्ति अनिवार्य की जाकर महिला सशक्तिकरण को प्रभावी बनाया गया है।

इसी के साथ वन संरक्षण तथा वन संवर्धन के प्रयासों में जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बसामन मामा स्मृति वन एवं वन्य-प्राणी संरक्षण योजना चालू है। इसके अलावा वन रक्षा एवं संवर्धन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को ‘शहीद अमृता देवी विश्नोई’ पुरस्कार से नवाजा जा रहा है।इस संबंध में मंत्री वन विभाग कुंवर विजय शाह ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि विभाग वनों की सुरक्षा और अवैध कटाई को सख्ती से रोकने में जुटा हुआ है। वन अपराधों की गोपनीय सूचनाओं के लिए मुखबिर तन्त्र को प्रभावी बनाया गया है। वन्य-प्राणी संरक्षित क्षेत्रों में 1490 वायरलेस-सेट की लायसेंस को मंजूरी दी गई है। वन सुरक्षा में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों का उपयोग भी किया जा रहा है।

वहीं उन्‍होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में 329 वन चौकी, four जल चौकी, 387 बैरियर और 53 अंतरराष्ट्रीय बैरियर के माध्यम से सुरक्षा और निगरानी की जा रही है। इसके अलावा मैदानी अमले को 12 बोर की 2600 नई पंप एक्शन बन्दूक, 900 वायना कुलर, साढ़े पांच हजार मोबाइल सिम और वन क्षेत्र वालों को 286 रिवाल्वर उपलब्ध कराए गए हैं, साथ ही विशेष सशस्त्र बल की तीन कंपनी भी तैनात रहती है। मंत्री शाह कहते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में वन विभाग, वन और वन्य-प्राणियों की सुरक्षा तथा वनों के विस्तार में हम सफल हुए हैं। हम मध्यप्रदेश को वन आधारित गतिविधियों में देश में प्रथम स्थान पर लाने की ओर अग्रसर हैं। साथ ही वे कहते हैं कि वानिकी विकास की दिशा में अनेकानेक नीतिगत निर्णय लगातार लिए जा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप वन और वन्य-प्राणियों के बेहत्तर प्रबंधन के साथ ही वनों पर आश्रित वनवासियों के जीवन-स्तर में सुधार हो रहा है। उन्‍होंने कहा कि देश में सबसे अधिक बाघ इसी प्रदेश में हैं। पिछले साल बाघों की संख्या 526 होने के साथ प्रदेश को एक बार दोबारा टाईगर स्टेट का दर्जा मिला है। इसी तरह तेंदुओं की संख्या के मामले में भी प्रदेश ने कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य को पीछे छोड़कर तेंदुआ स्टेट दर्जा मिलने का गौरव हासिल किया है। प्रदेश में three हजार 421 तेंदुओं की संख्या पाई गई है । देश में उपलब्ध तेंदुओं की संख्या में से 25 प्रतिशत अकेले मध्यप्रदेश में है। 
 
उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश में 13 राष्ट्रीय उद्यान और 24 अभ्यारण्य स्थित है। मुकुन्दपुर में सफेद बाघ सफारी, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान-जू भोपाल और रायसेन में तितली पार्क है। वन्य-प्राणी संरक्षण के क्षेत्र में पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं और अवसर उपलब्‍ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि प्रदेश का वन क्षेत्र लगातार बढ़ता रहे। यही कारण है कि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर मध्यप्रदेश में 94 हजार 689 वर्ग किलोमीटर (64,68,900 हेक्टेयर) कुल वन क्षेत्र है, जो राज्य के भू-भाग का 30.72 फीसदी और देश के कुल वन क्षेत्र का तकरीबन 12.38 फीसदी हो गया है। इससे पहले भारतीय वन सर्वेक्षण 2019 की रिर्पाट में बताया गया है कि साल 2005 में प्रदेश में अति सघन वन क्षेत्र 4239 वर्ग किलोमीटर था, जो 2019 में बढ़ कर 6676 वर्ग किलोमीटर अर्थात 6 लाख 67 हजार 600 हेक्टेयर हो गया था।

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