Farm Payments Protest: These so-called farmers are usually not collaborating in any motion however having fun with…


राजस्थान के कोटा से BJP विधायक मदन दिलावर ने कहा है कि चंद तथाकथित किसान आंदोलन पर अड़े हैं। ये किसी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले रहे, बल्कि अपने आनंद के लिए चिकन बिरयानी और मेवे का लुत्फ ले रहे हैं। यह बर्ड फ्लू फैलाने की साजिश है। अगर इन्हें प्रदर्शनस्थल से हटाया न गया, तो बर्ड फ्लू बड़ी समस्या बन सकती है।

शनिवार को उनके इसी बयान पर विवाद हो गया। दरअसल, उनके मुताबिक, देश को नष्ट करने की इच्छा रखने वाले उग्रवादी और लुटेरे केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों में संभवत: शामिल हो गए हैं। विधायक का आरोप है ‘‘तथाकथित’’ किसानों को देश की चिंता नहीं है, वे स्वादिष्ट व्यंजनों के अलावा अन्य ‘‘विलासिताओं’’ का आनंद ले रहे हैं और ‘‘पिकनिक मना रहे हैं’’।

उन्होंने यहां जारी एक वीडियो में बयान दिया कि प्रदर्शनकारी किसान प्रदर्शन स्थल पर मुर्गे-मुर्गियों का मांस और बिरयानी खाकर बर्ड फ्लू फैलाने का ‘‘षड्यंत्र’’ रच रहे हैं। राजस्थान कांग्रेस प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा विधायक के इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘‘शर्मनाक’’ टिप्पणी बताया और कहा कि यह ‘‘भाजपा की विचारधारा को दर्शाती’’ है।

उधर, नई दिल्ली में सिंघु बॉर्डर पर 39 साल के किसान अमरिंदर सिंह ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। हालांकि, जहर खाने के बाद उन्हें आनन-फानन अस्पताल ले जाया गया था, पर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

किसानों के मुताबिक, सिंह ने शाम करीब साढ़े चार बजे स्टेज के पीछे सल्फास की गोलियां खा ली थीं। वह जैसे ही स्टेज के आगे आए, तो अचानक गिर पड़े। उनकी हालत देख वहां हड़कंप मच गया, जिसके बाद मोबाइल एंबुलेंस से उन्हें सोपीनत स्थित फ्रैंक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ले जाया गया। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

वह सिंघु पर कई दिनों से डटे थे। ग्राम सरपंच जीत सिंह ने हमारे सहयोगी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “गांव में सिंह के पास लगभग एक एकड़ जमीन पर थी, पर वह बहुत उपजाऊ नहीं थी। दो-तीन साल पहले उन्होंने फतेहगढ़ साहिब इलाके में रहना शुरू किया था, जबकि उनकी विधवा मां गांव स्थित घर में रहती थी। खेती-किसानी से बमुश्किल ही आय पैदा हो पाती थी, इसलिए सिंह ने प्राइवेट बस कंपनी में कंडक्टरी करना शुरू कर दिया। हालांकि, मुझे यह नहीं मालूम कि वह इन दिनों क्या कर रहे थे।”

बताया जा रहा है कि उनका शव परिवार के हवाले कर दिया जाएगा, जो कि पंजाब के फतेहगढ़ साहिब स्थित मचरई कलां में रहता है। केंद्र द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में यह चौथा आत्मदाह है।

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