First Masik Shivratri Vrat 2021 is on Monday 11 january 2021


हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व है,यह भगवान शिव का दिन होता है. हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि ( Masik Shivratri ) के नाम से जाना जाता है, मासिक शिवरात्रि का व्रत कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी तिथि को किया जाता है. शिवरात्रि शिव और शक्ति के अभिसरण का महान पर्व है.

वर्ष 2021 की पहली मासिक शिवरात्रि ( Masik Shivratri 2021 ) 11 जनवरी, सोमवार को है। सोमवार शिवजी का दिन होता है और आज ही दिन शिवरात्रि भी पड़ी है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मासिक का अर्थ है ‘ महा या महीना’ और शिवरात्रि का अर्थ है ‘भगवान शिव की रात’ मान्यता है कि महा शिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि में भगवान शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे.

MUST READ : महा-शिवरात्रि 2021 की तारीख व मुहूर्त

पहली बार शिवलिंग की पूजा भगवान विष्णु और ब्रह्माजी ने की थी, इसीलिए महा शिवरात्रि को भगवान शिव के जन्मदिन के रूप में जाना जाता है. इस दिन श्रद्धालु शिवरात्रि के दिन शिवलिंग की पूजा करते हैं. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख और शांति बनी रहती है.
इस बार साल 2021 की पहली मासिक शिवरात्रि 11 जनवरी को मनाई जाएगी. शिवरात्रि व्रत प्राचीन काल से प्रचलित है. शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती और रति ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था.

मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त : Masik Shivratri 2021 shubh muhurat

पौष मास, कृष्ण चतुर्दशी :-

चतुर्दशी प्रारंभ : 11 जनवरी, सोमवार, दोपहर 02 बजकर 32 मिनट से
चतुर्दशी समाप्त : 12 जनवरी, मंगलवार, दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक.

मासिक शिवरात्रि पूजन विधि : Masik Shivratri Puja Vidhi
– इस दिन सूर्योदय से पहले उठें- स्नान करें, भगवान शिव का ध्‍यान कर व्रत का संकल्‍प लें.

– शिवलिंग पर जलए घी, दूध, शक्‍कर, शहद, दही आदि अर्पित करें. बाबा भोलेनाथ को बेलपत्रए धतूरा आदि चढ़ाएं.

– ऊं नमरू शिवाय मंत्र का लगातार जप करें.

– भगवान शिव के साथ माता पार्वती की आरती भी करें.

– भगवान को लगाए जाने वाले भोग में कुछ मीठा जरूर शामिल करें.

मासिक शिवरात्रि का महत्व : Significance of Masik Shivratri
मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, क्योंकि इस व्रत में व्यक्ति को अपने अवगुणों का त्याग करना होता है. इस व्रत को करके देवी-देवताओं ने मनचाहा वरदान पाया है, भगवान शिव के पूजन के लिए उचित समय प्रदोष काल माना जाता है. शिव पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत करके भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और जीवन की मुश्किलें दूर होती हैं.

















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