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14 घंटे पहले

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महात्मा बुद्ध ने कहा है अप्रमाद ही अमृत पद यानी प्रगति चाहते हैं तो आलस का त्याग करना ही होगा। जहां आलस होता है, वहां बड़ी से बड़ी संपत्ति और व्यापार नष्ट हो जाता है। अगर ऊंचाइयों पर पहुंचना चाहते हैं और अपने कार्यक्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं तो ये आज ही तय करें कि अब आलस नहीं करेंगे।

प्रकृति भी आलसी व्यक्ति को शारीरिक बीमारियों के रूप में कष्ट देती है। इसमें शंका होनी नहीं चाहिए कि आलस्य वास्तव में अंधकार का मार्ग है। अगर आप आलस करेंगे तो धीरे-धीरे सुख-समृद्धि खत्म होने लगती है।

आलस तमोगुणी जीवन का एक घातक विकार है। जो इंद्रिय सुख, अनियमित खान-पान, अहंकार, निर्दयता, असत्य की वजह से बढ़ता है। यह प्रारंभ में तो अच्छा लगता है, लेकिन बाद में इसकी वजह से अंत बहुत दुखदायक होता है।

जीवन के कार्यक्षेत्र में सम्पूर्ण प्रगति के लिये आलस्य का त्याग परम आवश्यक है। देश में कई महान लोग हुए हैं, जिन्हें धन और साधनों से महानता नहीं मिली, बल्कि लगातार कर्म करते रहने से, सक्रिय रहने से और त्याग की भावना से मिली है। महान लोगों ने आलस को त्यागकर ही अपने-अपने कर्मक्षेत्र में सफलता हासिल की है।

– योगगुरु वाईके शर्मा

लेखक – योगाश्रय सेवायतन प्राकृतिक चिकित्सा एवं ध्यान योग केंद्र जयपुर, राजस्थान के संस्थापक हैं।

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