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नई दिल्ली14 मिनट पहले

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राज्यों के पास पैसा नहीं है और वे पूंजीगत खर्च घटा रहे हैं

  • इंफ्रास्ट्रक्चर और संपत्ति सृजन पर कुल सरकारी खर्च में देश के 28 राज्यों का करीब 60% योगदान होता है
  • लेकिन इन राज्यों की टैक्स आय घट रही है और कोरोना महामारी से लड़ने में उन्हें ज्यादा खर्च भी करना पड़ रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि पूंजीगत खर्च बढ़ाकर देश को सबसे तेज विकास दर वाली बड़ी अर्थव्यवस्था का ताज फिर से हासिल करने में मदद करें, लेकिन देश के राज्यों की हालत इस योजना को फेल कर सकती है, क्योंकि इन राज्यों के पास पैसा नहीं है और वे पूंजीगत खर्च घटा रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और संपत्ति सृजन पर कुल सरकारी खर्च में देश के इन 28 राज्यों का करीब 60% योगदान होता है। लेकिन इन राज्यों की टैक्स आय घट रही है और कोरोनावायरस महामारी से लड़ने में इन्हें ज्यादा खर्च भी करना पड़ रहा है।

केंद्र सरकार की तरह इन राज्यों के पास सीमा से ज्यादा कर्ज लेने की सूलियत भी नहीं है। सिटीग्रुप इंक के अर्थशास्त्री समीरन चक्रवर्ती ने कहा कि पिछले तीन महीने केंद्र सरकार के खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन देश के राज्य वित्तीय संतुलन बनाने के लिए खर्च घटा रहे हैं। इससे देश की विकास दर प्रभावित हो सकती है।

विकास दर बढ़ाने के लिए मोदी सरकार अगले साल ज्यादा पूंजीगत खर्च करेगी

PM मोदी की सरकार ने अगले कारोबारी साल में पूंजीगत खर्च को 26% बढ़ाककर 5.54 लाख करोड़ रुपए (76 अरब डॉलर) करने का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने उम्मीद जताई है कि इससे देश की विकास दर दहाई अंकों में पहुंच जाएगी। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के कारण इस कारोबारी साल (2020-21) में देश की अर्थव्यवस्था में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट आने की आशंका है।

केंद्र सरकार 1 रुपए खर्च करे तो देश की GDP 3.14 रुपए बढ़ सकती है

क्वांटेको की रिसर्च इकॉनोमिस्ट यूविका सिंघल ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का अनुमान है कि केंद्र सरकार द्वारा खर्च किए जाने वाले हर एक रुपया से देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 3.14 रुपए की बढ़ोतरी होगी। वहीं राज्य यदि एक रुपया खर्च करेंगे, तो देश की GDP में 2 रुपए की बढ़ोतरी होगी। लेकिन राज्य ज्यादा खर्च नहीं कर रहे हैं।

17 बड़े राज्यों का कैपेक्स घटने से देश की GDP से 3.6 लाख करोड़ रुपए गायब हो जाएंगे

सिंघल ने कहा कि देश के 17 प्रमुख राज्यों का कैपिटल एक्सपेंडीचर अप्रैल से दिसंबर 2020 तक के 9 महीने में एक साल पहले के मुकाबले 23.5% घट गया है और इस कारोबारी साल में उनका कुल कैपिटल एक्सपेंडीचर एक साल पहले के मुकाबले 1.eight लाख करोड़ रुपए कम रहने की आशंका है। इस कमी के कारण देश की GDP से 3.6 लाख करोड़ रुपए गायब हो सकते हैं। दूसरी ओर इस कारोबारी साल में केंद्र सरकार के अतिरिक्त खर्च से GDP में महज 848 अरब रुपए की ही बढ़ोतरी हो पाएगी।

RBI ने भी राज्यों की कम खर्ची पर जताई है चिंता

RBI ने भी राज्यों की कम खर्ची पर चिंता जताई है। केंद्रीय बैंक ने दिसंबर में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि राज्य सरकारों द्वारा खर्च घटाए जाने से केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन पर नकारात्मक असर हो सकता है। इससे निवेश की रिकवरी और आर्थिक तेजी प्रभावित हो सकती है।

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