Neeta Ambani retains herself very busy with work, however what do she love to do on trip? Know-खुद को…


आज दुनिया के सबसे रईस कारोबारी मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी कभी मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थीं। यही वजह है कि सफलता के चरम पर पहुंचने के बाद भी वो अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं। एक आम मां की तरह नीता को अपने बच्चों को ख्याल रहता है तो एक आदर्श पत्नी की तरह वो मुकेश की देखभाल करती हैं। उनका कहना है कि अगर वो मुंबई में हों तो सप्ताह में एक दिन परिवार के साथ बिताना बेहद सुकून देता है।

नीता की अपनी एक अलग पहचान है। उनके पास अपना कारोबार भी है, जिसमें धीरूभाई अंबानी स्कूल के अलावा वो IPL की अपनी टीम मुंबई इंडियंस को लेकर व्यस्त रहती हैं। नीता कहती हैं कि उनके लिए मां बनना जीवन का सबसे अहम पल रहा। आज भी वो खुद को चिकोटी काटकर उस लम्हे को याद करती हैं, जब शादी के eight साल बाद उन्हें मां बनने की अनुभूति पहली बार हुई। उनका कहना है कि वो हमेशा अपने बच्चों के संपर्क में रहती हूं। उन्हें पता होता है कि कौन सा बच्चा कब कहां है। उनकी समस्याओं का समाधान वो और मुकेश मिलकर करते हैं। आईपीएल के दौरान मुकेश ही बच्चों का ध्यान रखते हैं।

नीता फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती हैं। वह सुबह 7 बजे तक बिस्तर छोड़ देती हैं। दिन की शुरुआत डांस प्रैक्टिस से होती है। इसके बाद वो काम पर जाती हैं। वो अपने सारे काम हर रोज एक ही जगह पर करना पसंद नहीं करती हैं। अगर स्कूल में हों तो सारी मीटिंग्स वहीं होंगी। आईपीएल के दौरान सारा काम या तो स्टेडियम में होता है या फिर होटल में। हॉस्पिटल में होने के दौरान भी मैं अपनी सारी मीटिंग्स वहीं निपटाती हैं।

उनका कहना है कि वो अपने हर काम को मिशन की तरह से लेती हैं। क्रिकेट में उनकी रुचि कभी नहीं थी। लेकिन जब मुकेश ने टीम खरीदी तो उसके बाद उन्होंने खेल की बारीकियों को समझना शुरू किया। अफ्रीका में हुए IPL-2 सीजन में जब टीम 6 गेंदों में 9 रन नहीं बना सकी तब मैंने तय किया कि अब बेहतर करना है। उसके बाद क्रिकेट को जीने की कोशिश की। हर तरह के मैच देखे। उस दौरान उनका मकसद सिर्फ सीखना था। उनका कहना है कि काम के दौरान वो डिस्टर्ब होना पसंद नहीं करतीं। धीरूभाई अंबानी स्कूल के एडमिशन के दौरान वो अपना मोबाइल बंद ही रखती हैं। उनका मानना है कि स्कूल के दाखिलों में सिफारिश की कोई जगह नहीं। अगर बच्चा मेधावी है तो ही उसे स्कूल में दाखिला मिलना चाहिए।

नीता का कहना है कि वो अपना हर काम परफेक्शन से करना चाहती हैं। चाहें वो किसी मशीन की खरीद हो या फिर किसी डॉक्टर की नियुक्ति। हर काम में वो खुद को बहुत ज्यादा INVOLVE कर लेती हैं। लेकिन उनके घनिष्ठ मित्र डॉ. पारेख को यह आदत पसंद नहीं है। वो अक्सर उन्हें हिदायत देते हैं कि छोटी-मोटी चीजों में खुद को इतना मत उलझाओ। शादी के 17 साल तक वो एक आम वर्किंग हाउस वाइफ की तरह से थीं। काम से लौटने के बाद घर के काम निपटाना और बच्चों को सुलाने के बाद अपने पति का डिनर पर इंतजार करना। लेकिन अब चीजें पहले से काफी अलग हैं।

मुंबई प्रवास के दौरान फुर्सत के लम्हों में वो कोलाबा के US CLUB जाना पसंद करती हैं। वहां का लाईट हाउस उन्हें भाता है। अपने आखिरी DAY OFF को याद करते हुए वो कहती हैं कि Botswana की ट्रिप बेहतरीन रही थी। तीनों बच्चों और मुकेश के साथ दिलकश वादियों में समय बिताना वाकई दिल को सुकून पहुंचाने वाला था। तब न तो फोन था और न ही ईमेल्स और कोई मीटिंग। उनका कहना है कि साल में वो 3-Four बार SAFARIS पर जाती हैं। अगर मुंबई में हों तो सप्ताह में एक दिन खुद को परिवार में व्यस्त रखना अच्छा लगता है।




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