Pakistan also needs to punish Lakhvi for Mumbai assault: America – लखवी को मुंबई हमले के लिए भी सजा दे…


पाकिस्तान की एक आतंक रोधी अदालत ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी को आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में शुक्रवार को पांच साल जेल की सजा सुनाई. देश में खुलेआम घूम रहे आतंकवादियों के खिलाफ कदम उठाने के लिए पाकिस्तान पर बढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अदालत का यह फैसला शुक्रवार को आया.

न्यायाधीश एजाज अहमद बतर ने लखवी को तीन अपराधों के लिए पांच-पांच साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई और तीन लाख पाकिस्तानी रुपये (करीब 620 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाया. जुर्माना नहीं चुकाने पर उसे प्रत्येक अपराध के लिए छह-छह महीने की और सजा काटनी होगी. उसकी सजा एक साथ चलेगी.

भारत ने लखवी को आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में पाकिस्तानी अदालत द्वारा जेल की सजा सुनाए जाने के बाद पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठकों से पहले ”आडंबर करना” पाकिस्तान के लिए आम बात हो गई है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि ये कदम साफ दिखाते हैं कि इनका मकसद फरवरी 2021 में एफएटीएफ की पूर्ण बैठक और एपीजेजी (एशिया प्रशांत संयुक्त समूह) की बैठक से पहले कार्रवाई करते हुए दर्शाना है. उन्होंने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण बैठकों से पहले इस प्रकार का आडबंर करना पाकिस्तान के लिए आम बात हो गई है.”

श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित संगठन और घोषित आतंकवादी पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के भारत विरोधी एजेंडे को पूरा करने के लिए उसके परोक्ष माध्यम के रूप में काम करते हैं. पाकिस्तान को जवाबदेह बनाना और यह सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह आतंकवादी संगठनों, आतंकवाद के बुनियादी ढांचों और आतंकवादियों के खिलाफ विश्वसनीय कार्रवाई करे.”

लखवी को शुक्रवार को लाहौर एटीसी के सामने पेश किया गया और उसी दिन उसे आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में दोषी ठहराया गया. कुछ समय पहले उसके खिलाफ यह मामला दर्ज हुआ था.

अदालत को बताया कि पंजाब के ओकरा जिले में रेनाल खुर्द का निवासी लखवी इस मामले में गिरफ्तारी के पहले इस्लामाबाद में रह रहा था.

लश्कर-ए-तैयबा और अलकायदा के साथ जुड़ाव तथा दोनों आतंकी संगठनों के साथ मिलकर वित्तपोषण, साजिश रचने, आतंकी कृत्य के लिए लखवी को दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया था. घोषित आतंकवादियों और संगठनों की संपत्तियां जब्त कर ली जाती है. वहीं सभी देशों को ऐसे व्यक्ति और संगठन की संपत्ति जब्त करने, आर्थिक संसाधन पर रोक लगाने की कार्रवाई करनी होती है और यात्रा पर प्रतिबंध लगाया जाता है.

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल कायदा प्रतिबंध कमेटी ने लखवी को उसके निजी खर्च के लिए हर महीने 1.5 लाख पाकिस्तानी रुपये भुगतान करने की इजाजत दी थी. लखवी की गिरफ्तारी के 10 दिन पहले यह अनुमति मिली थी.

आतंकवाद के वित्तपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) ने भी पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया है. पेरिस मुख्यालय वाले एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया था और 2019 के अंत तक धनशोधन तथा आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ ठोस कदम उठाने को कहा था. हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण समय सीमा आगे बढ़ा दी गई थी.

गुजरांवाला में एक आतंक रोधी अदालत ने बृहस्पतिवार को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ आतंक के वित्तपोषण के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. अदालत ने जेईएम के कुछ सदस्यों के खिलाफ पंजाब के आतंक रोधी विभाग द्वारा दर्ज आतंकवाद के वित्तपोषण के मामले में सुनवाई के दौरान अजहर के खिलाफ वारंट जारी किया था.

वर्ष 2008 में मुंबई हमले के लिए जमात उद दावा (जेयूडी) प्रमुख हाफिज सईद के नेतृत्व वाला लश्कर-ए-तैयबा जिम्मेदार था. हमले में छह अमेरिकी समेत 166 लोगों की मौत हो गयी थी. संयुक्त राष्ट्र ने सईद को वैश्विक आतंकी घोषित किया था और अमेरिका ने उस पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है.

(इनपुट भाषा से भी) 

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