‘Police going to farmers’ home, convincing by relations to cease them-Tikait-‘किसानों के घर जा रही…


किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि पुलिस किसानों के घर जा रही है। खाना खाकर रिश्तेदारों के जरिए लोगों को समझाती है कि इसे रोको, दिल्ली मत जाने दो। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यूपी के सहारनपुर में इस तरह का वाकया देखने को मिला है। उनका कहना था कि यूपी, गुजरात, बिहार में सरकारी मशीनरी आंदोलन में लोगों को आने से रोक रही है। लेकिन आंदोलन सारे देश में फेल चुका है।

टिकैत का कहना था कि गुजरात में तो पुलिस किसानों को पकड़कर जेल में भी बंद कर रही है। उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार के विवादित कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के लिए समर्थन मांगने के वास्ते जल्द गुजरात का दौरा करेंगे। वहां किसानों के साथ नाइंसाफी हो रही है। हम वहां जाएंगे और मीटिंग करेंगे। वहां के किसानों की आवाज उठाएंगे और गुजरात को केंद्र के चंगुल से आजाद करवाएंगे। उनका कहना है कि 26 जनवरी की घटना के बाद पुलिस भी गांवों में किसानों के घर जाकर रेड कर रही है। इससे भी माहौल खराब हो रहा है।

टिकैत ने कहा कि रेल आंदोलन का उद्देश्य लोगों को यह बताना था कि रेल तो चल ही नहीं रही हैं। उनका कहना था कि रेल रोककर हमने यात्रियों को खाना खिलाया और लस्सी पिलाई। हमारा मकसद सभी लोगों को किसानों की समस्या को बताना था। उनका कहना था कि आंदोलन अब दक्षिण भारत के राज्यों तक फैल चुका है।

आंदोलन स्थल पर किसानों की घटती संख्या के मद्देनजर किसान नेताओं ने अपनी रणनीति बदली है। किसान नेताओं से हरियाणा और पंजाब में महापंचायत आयोजित नहीं करने का फैसला किया है। टिकैत ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के किसानों को कृषि कानूनों को लेकर जानकारी है। यहां के किसान जागरूक हैं। लेकिन दूसरे राज्यों के किसान कृषि कानूनों को लेकर जागरूक नहीं हैं। लेकिन अभी आंदोलन को सीमा पर मजबूत करने की जरूरत है।

ध्यान रहे कि किसान नेता लोगों से यह भी कह रहे हैं कि वे चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों को वोट न दें। उनका मानना है कि बीजेपी हारेगी तभी किसान जीतेगा। टिकैत का कहना था कि सरकार सोच रही है कि किसान थककर लौट जाएगा, लेकिन उन्हें यह पता होना चाहिए कि हम यहां से तब तक नहीं जाने वाले जब तक जीत नहीं मिल जाती।




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